अगर आपने कभी सोचा है कि Vitamin A की कमी से कौन-सी बीमारी होती है, तो इसका सबसे आसान जवाब है – रतौंधी। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती। विटामिन A की कमी सिर्फ आंखों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह त्वचा और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी असर डालती है। आइए, इसे आसान और साफ भाषा में समझते हैं।
सबसे पहले जानते हैं: vitamin A ki kami se kaun sa rog hota?
जब शरीर में पर्याप्त विटामिन ए नहीं होता, तो सबसे पहला और मुख्य रोग है रतौंधी (Night Blindness)। यानी शाम ढलते ही आंखें धुंधली दिखने लगती हैं। बच्चे जब अंधेरे में ठोकर खाते हैं या चीजें नहीं पहचान पाते, तो यह इसी का संकेत है।
लेकिन यहीं नहीं रुकता। बढ़ती कमी से आंखों की रोशनी और भी कमजोर होती है। सूखापन आता है। कॉर्निया पर धब्बे पड़ सकते हैं। गंभीर मामलों में अंधापन तक हो सकता है। दुनिया भर में छोटे बच्चों में अंधेपन का सबसे बड़ा कारण विटामिन ए की कमी ही है।
विटामिन ए की कमी के लक्षण – पहचानिए समय रहते
रतौंधी (पहला और सबसे जरूरी लक्षण)
जैसे ही सूरज डूबता है, आपको रास्ता दिखना बंद हो जाता है। गाड़ी चलाने में परेशानी होती है। बच्चे अंधेरे में डर जाते हैं। अगर आपको यह समस्या है, तो समझिए शरीर में विटामिन ए का स्टॉक खत्म हो रहा है।
आंखों का सूखापन और धुंधलापन
आंखें चिकनी नहीं रहतीं। रूखी और बेजान लगती हैं। कभी-कभी कॉर्निया पर सफेद दाग (बिटॉट स्पॉट) बन जाते हैं। बच्चों की आंखें चमकना बंद कर देती हैं।
त्वचा रूखी और खुरदरी हो जाती है
हाथ-पैरों की त्वचा छिलने लगती है। कोहनियों और घुटनों पर रेत जैसा खुरदरापन आ जाता है। बार-बार फुंसियां या दाने निकलते हैं।
बार-बार संक्रमण होना
विटामिन ए को "एंटी-इंफेक्शन विटामिन" भी कहते हैं। कमी हो तो नाक-गला-कान के संक्रमण बार-बार होते हैं। बुखार-जुकाम जल्दी पकड़ता है। जख्म देर से भरते हैं।
बच्चों की ग्रोथ रुक जाती है
जिन बच्चों में विटामिन ए की कमी होती है, उनका वजन और ऊंचाई सही से नहीं बढ़ती। वे कमजोर और सुस्त रहते हैं।
इलाज – कैसे दूर करें विटामिन ए की कमी?
सबसे अच्छा इलाज है – रोज की डाइट में सुधार। दवा तो अस्थाई समाधान है। असली समाधान आपकी थाली में छिपा है।
खाने की चीजें जो विटामिन ए देती हैं
पीले और नारंगी रंग की सब्जियां-फल
गाजर, कद्दू, पपीता, आम, शकरकंद। ये सबसे अच्छे स्रोत हैं। रोज एक गाजर या आम खाइए। बच्चों को पपीता जरूर दीजिए।
हरी पत्तेदार सब्जियां
पालक, मेथी, सरसों का साग, बथुआ। ये सस्ती और असरदार हैं। इन्हें रोटी-दाल में मिलाकर खाएं।
दूध, दही, पनीर, अंडे और लीवर
नॉन-वेज खाने वाले लीवर (कलेजी) खाएं – इसमें विटामिन ए भरपूर होता है। अंडे की जर्दी भी अच्छा स्रोत है।
लाल पाम ऑयल (Red Palm Oil)
यह ग्रामीण इलाकों में आसानी से मिल जाता है। इसमें प्राकृतिक विटामिन ए होता है।
तेल या घी के साथ खाएं – यह जरूरी है
विटामिन ए फैट में घुलने वाला होता है। यानी बिना चिकनाई के यह शरीर में अवशोषित नहीं होगा। गाजर या पालक को घी या तेल में डालकर पकाइए। सलाद पर घी छिड़किए।
डॉक्टर से सलाह लें
गंभीर कमी होने पर डॉक्टर विटामिन ए की गोलियां या सिरप देते हैं। बच्चों को कुछ दिनों तक तेज खुराक दी जाती है (जैसे 1 लाख से 2 लाख आईयू)। लेकिन यह खुद से न करें – ज्यादा विटामिन ए जहर की तरह है। खासकर गर्भवती महिलाएं बिना डॉक्टर के कोई दवा न लें।
सरकारी कार्यक्रमों का फायदा उठाएं
भारत सरकार हर छह महीने में 6 महीने से 5 साल के बच्चों को विटामिन ए की तेज खुराक (ब्लू डोज) आंगनबाड़ी और स्कूलों में देती है। जरूर पिलाइए। यह रतौंधी और अंधेपन से बचाता है।
रोकथाम – एक गाजर रोज रखेगी मुफलिसी दूर
सच्चाई यह है कि विटामिन ए की कमी से बचना बहुत आसान है। बस थोड़ी सी जागरूकता चाहिए।
- बच्चों को रोज एक कटोरी हरी सब्जी या पीले फल दीजिए।
- आम के मौसम में जमकर आम खाइए – यह प्रकृति का तोहफा है।
- गाजर का हलवा या सूप बनाइए – बच्चे भी मजे से खाएंगे।
- अगर आपके गांव में लाल पाम ऑयल मिलता है, तो उसका इस्तेमाल कीजिए।
आखिर में याद रखिए
Vitamin A ki kami se kaun sa rog hota – रतौंधी और फिर अंधापन। लेकिन यह बीमारी सौ फीसदी ठीक होने वाली है। बस थाली में रंग लाइए। गाजर, पपीता, पालक, दूध, अंडा – ये आपकी आंखों की रोशनी बचाएंगे।
बच्चों को अगर शाम को ठोकर लगे, तो अनदेखा न करें। यह चिल्लाता हुआ संकेत है। आज से ही अपनी डाइट में बदलाव कीजिए। और हां, विटामिन ए की गोली बिना डॉक्टर के न खाइए – जरूरत से ज्यादा नुकसान भी कर सकता है।
आंखें अनमोल हैं। उन्हें विटामिन ए दीजिए, वे आपको दुनिया दिखाती रहेंगी। साथ ही, भविष्य की सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य बीमा की योजना बनाना भी एक समझदारी भरा कदम है, ताकि किसी भी स्वास्थ्य समस्या में आर्थिक चिंता न हो।

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